उत्तराखंड

हल्द्वानी में स्कूली छात्रों ने उड़ाए हाइड्रो रॉकेट, प्लास्टिक बोतल और एयर प्रेशर से किया प्रयोग

Kavita2
4 Oct 2026 2:38 PM IST
हल्द्वानी में स्कूली छात्रों ने उड़ाए हाइड्रो रॉकेट, प्लास्टिक बोतल और एयर प्रेशर से किया प्रयोग
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हल्द्वानी। गौलापार स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर में रविवार को विज्ञान और नवाचार से जुड़ी एक रोचक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यहां आकाशीयन स्पर्धा नेशनल रॉकेटरी चैलेंज के तहत स्कूली विद्यार्थियों के लिए हाइड्रो रॉकेट प्रतियोगिता कराई गई। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी तकनीकी समझ, रचनात्मकता और प्रयोगात्मक सोच का प्रदर्शन करते हुए पानी और एयर प्रेशर से तैयार किए गए रॉकेट उड़ाए।

इस प्रतियोगिता का सबसे खास पहलू यह रहा कि विद्यार्थियों ने हाइड्रो रॉकेट तैयार करने के लिए सामान्य प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल किया। छात्रों के मुताबिक, बोतल के अंदर करीब 70 प्रतिशत पानी भरा जाता है। इसके बाद एयर प्रेशर की मदद से दबाव बनाया जाता है और उसी दबाव के जरिए रॉकेट को हवा में छोड़ा जाता है। साधारण सामग्री से तैयार यह मॉडल विद्यार्थियों के लिए विज्ञान को समझने का व्यावहारिक माध्यम बना।

हाइड्रो रॉकेट प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों के बीच प्रतिस्पर्धा कराना नहीं था, बल्कि उन्हें विज्ञान के सिद्धांतों को प्रयोग के माध्यम से समझाना भी था। छात्रों ने बताया कि रॉकेट उड़ाने के लिए पानी और हवा के दबाव के बीच संतुलन बनाना जरूरी होता है। प्रयोग के दौरान रॉकेट के डिजाइन, पानी की मात्रा और एयर प्रेशर जैसे पहलुओं को समझने का अवसर मिला।

विद्यार्थियों के अनुसार, प्लास्टिक बोतल में पानी भरने के बाद उसमें एयर प्रेशर डाला जाता है। जब दबाव एक निश्चित स्तर तक पहुंचता है तो पानी नीचे की ओर तेजी से बाहर निकलता है और उसके विपरीत बल के कारण बोतल ऊपर की ओर गति करती है। इसी वैज्ञानिक सिद्धांत का इस्तेमाल हाइड्रो रॉकेट को उड़ाने के लिए किया जाता है।

प्रतियोगिता में शामिल विद्यार्थियों में इस प्रयोग को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। छात्रों ने न केवल रॉकेट तैयार किए, बल्कि उसे सफलतापूर्वक लॉन्च करने के लिए कई बार अभ्यास भी किया। कई विद्यार्थियों के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने किताबों में पढ़े वैज्ञानिक सिद्धांत को प्रत्यक्ष रूप से प्रयोग करके देखा।

आयोजकों का उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें प्रयोग आधारित सीखने के लिए प्रेरित करना रहा। हाइड्रो रॉकेट जैसे मॉडल कम लागत में तैयार किए जा सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को यह समझने का मौका मिलता है कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं या महंगे उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में उपलब्ध सामान्य वस्तुओं के जरिए भी वैज्ञानिक प्रयोग किए जा सकते हैं।

विद्यार्थियों ने बताया कि उन्होंने रॉकेट के मॉडल को तैयार करने से पहले उसके आकार और संरचना पर भी ध्यान दिया। बोतल की मजबूती, पानी की मात्रा और उसमें बनने वाले दबाव का असर रॉकेट की उड़ान पर पड़ता है। इस प्रक्रिया में छात्रों को डिजाइन और संतुलन की भूमिका समझने का मौका मिला।

हाइड्रो रॉकेट को लेकर विद्यार्थियों की सोच केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रही। उनका कहना है कि भविष्य में ऊर्जा और ईंधन के वैकल्पिक स्रोतों पर अधिक ध्यान देना होगा। इसी सोच के साथ प्रतियोगिता को फ्यूल कंजर्वेशन यानी ईंधन संरक्षण की अवधारणा से भी जोड़ा गया।

छात्रों ने बताया कि इन दिनों हाइड्रोजन या अन्य वैकल्पिक ऊर्जा आधारित तकनीकों को लेकर लगातार काम हो रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन और हाइड्रोजन कार जैसे उदाहरणों के बीच वे भविष्य में हाइड्रो तकनीक से जुड़े नए प्रयोगों की कल्पना कर रहे हैं। विद्यार्थियों की यह सोच बताती है कि कम उम्र में ही वे ऊर्जा संरक्षण और भविष्य की तकनीक के बारे में रुचि विकसित कर रहे हैं।

हालांकि हाइड्रो रॉकेट और हाइड्रोजन आधारित वाहनों की तकनीक अलग-अलग है, लेकिन प्रतियोगिता के माध्यम से छात्रों को वैकल्पिक ऊर्जा और संसाधनों के संरक्षण की व्यापक अवधारणा से परिचित कराने का प्रयास किया गया। छात्रों के लिए यह अनुभव विज्ञान के साथ पर्यावरण और ऊर्जा के मुद्दों को समझने का अवसर भी बना।

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने बनाए रॉकेटों को मैदान में लॉन्च किया। रॉकेट के हवा में जाने की प्रक्रिया को देखने के लिए वहां मौजूद लोगों में भी उत्सुकता रही। जब बोतल से पानी तेज गति से बाहर निकला और रॉकेट ऊपर की ओर गया तो विद्यार्थियों में खासा उत्साह दिखाई दिया।

ऐसी गतिविधियां छात्रों को टीमवर्क भी सिखाती हैं। रॉकेट तैयार करने से लेकर उसे लॉन्च करने तक विद्यार्थियों को योजना बनानी पड़ती है। किसी को डिजाइन की जिम्मेदारी संभालनी होती है तो कोई पानी और एयर प्रेशर की व्यवस्था देखता है। इस तरह विज्ञान के साथ सहयोग और समस्या समाधान की क्षमता भी विकसित होती है।

हाइड्रो रॉकेट मॉडल बनाते समय छात्रों को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है। यदि पानी की मात्रा ज्यादा या कम हो जाए, एयर प्रेशर ठीक न हो या बोतल का डिजाइन संतुलित न हो तो रॉकेट अपेक्षित ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे में विद्यार्थी प्रयोग के बाद अपनी गलतियों को पहचानकर दोबारा सुधार करते हैं।

यही प्रक्रिया वैज्ञानिक सोच को मजबूत करती है। किसी प्रयोग के सफल या असफल होने के बाद उसके कारणों का विश्लेषण करना और फिर दोबारा प्रयास करना विज्ञान सीखने का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाइड्रो रॉकेट प्रतियोगिता ने छात्रों को इसी तरह के अनुभव उपलब्ध कराए।

प्रतियोगिता का आयोजन आकाशीयन स्पर्धा नेशनल रॉकेटरी चैलेंज के तहत किया गया। स्कूल स्तर के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, रॉकेट तकनीक और वैज्ञानिक प्रयोगों से जोड़ना इस तरह के आयोजनों का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इससे बच्चों में विज्ञान और तकनीक के प्रति जिज्ञासा बढ़ सकती है।

विद्यार्थियों ने कहा कि उन्होंने प्लास्टिक की बोतल को रॉकेट के रूप में इस्तेमाल किया और उसमें लगभग 70 प्रतिशत पानी भरा। इसके बाद एयर प्रेशर बनाकर उसे लॉन्च किया गया। उनके लिए यह प्रयोग इसलिए खास था क्योंकि इसमें किसी महंगे ईंधन की जरूरत नहीं पड़ी और पानी तथा हवा के दबाव की मदद से रॉकेट को उड़ाया गया।

फ्यूल कंजर्वेशन से जुड़े संदेश को छात्रों ने भविष्य की तकनीक से जोड़ते हुए कहा कि आने वाले समय में ऊर्जा के नए स्रोतों पर निर्भरता बढ़ेगी। उनका मानना है कि वैज्ञानिक सोच और संसाधनों के बेहतर उपयोग से ऐसी तकनीक विकसित की जा सकती है, जो पर्यावरण के लिए भी बेहतर हो।

प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया। कई छात्रों के लिए रॉकेट बनाना केवल एक स्कूल गतिविधि नहीं, बल्कि विज्ञान के क्षेत्र में अपने भविष्य को लेकर रुचि विकसित करने वाला अनुभव रहा। इस तरह के मॉडल आगे चलकर छात्रों को एयरोस्पेस, इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी क्षेत्रों की ओर प्रेरित कर सकते हैं।

गौलापार स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने खेल परिसर के मंच को वैज्ञानिक गतिविधि के लिए भी उपयोगी बनाया। मैदान में रॉकेट लॉन्च करने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होने के कारण विद्यार्थियों को सुरक्षित तरीके से प्रयोग करने का अवसर मिला।

ऐसे आयोजनों में सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है। रॉकेट लॉन्च के दौरान विद्यार्थियों को निर्धारित दूरी और आवश्यक सावधानियों का पालन करना होता है। हाइड्रो रॉकेट अपेक्षाकृत साधारण मॉडल होने के बावजूद एयर प्रेशर के कारण तेजी से ऊपर जाता है, इसलिए लॉन्च क्षेत्र को व्यवस्थित रखना जरूरी होता है।

प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को भौतिक विज्ञान के कई मूल सिद्धांतों का व्यावहारिक अनुभव मिला। पानी का दाब, हवा का दबाव, प्रतिक्रिया बल, संतुलन और गति जैसे विषयों को उन्होंने अपने प्रयोग के जरिए समझा। इससे पाठ्यपुस्तक आधारित ज्ञान को वास्तविक अनुभव से जोड़ने में मदद मिली।

हाइड्रो रॉकेट की खासियत यह है कि इसे कम लागत वाली सामग्री से तैयार किया जा सकता है। स्कूल स्तर पर विज्ञान मॉडल और प्रयोगों के लिए यह एक उपयोगी तरीका हो सकता है। विद्यार्थियों को इसमें अपने मॉडल में बदलाव कर परिणामों की तुलना करने का भी अवसर मिलता है।

छात्रों ने यह भी बताया कि प्रतियोगिता में रॉकेट की उड़ान को देखकर उन्हें अपने मॉडल में सुधार करने की प्रेरणा मिली। किस डिजाइन से रॉकेट ज्यादा स्थिर रहता है, किस मात्रा में पानी बेहतर प्रदर्शन देता है और एयर प्रेशर का कितना प्रभाव पड़ता है, ऐसे सवालों के जवाब उन्हें प्रयोग के दौरान तलाशने पड़े।

हाइड्रो रॉकेट प्रतियोगिता का एक सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश भी रहा। छात्रों ने संसाधनों के संरक्षण की बात करते हुए ईंधन की बचत को भविष्य के लिए जरूरी बताया। उनका मानना है कि ऊर्जा की खपत कम करने और वैकल्पिक तकनीकों को बढ़ावा देने से भविष्य की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकता है।

हालांकि हाइड्रो रॉकेट अभी शैक्षणिक प्रयोग और प्रतियोगिता के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इसे आधुनिक रॉकेट तकनीक का व्यावसायिक विकल्प नहीं माना जा सकता। लेकिन विज्ञान की बुनियादी अवधारणाएं समझाने के लिए यह मॉडल छात्रों के बीच लोकप्रिय है।

इस प्रतियोगिता ने यह भी दिखाया कि स्कूली विद्यार्थी तकनीकी विषयों में रुचि रखते हैं और उन्हें सही मंच मिले तो वे नए प्रयोग करने के लिए तैयार रहते हैं। साधारण प्लास्टिक बोतल से रॉकेट तैयार कर उसे उड़ाने का अनुभव उनके लिए विज्ञान को मनोरंजक और व्यावहारिक बनाने वाला रहा।

आयोजकों की कोशिश ऐसे ही आयोजनों के जरिए विद्यार्थियों को विज्ञान और नवाचार की ओर आकर्षित करने की है। रॉकेटरी चैलेंज जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेने से बच्चों को अपनी रचनात्मक क्षमता दिखाने के साथ प्रतिस्पर्धात्मक भावना में सीखने का अवसर मिलता है।

भविष्य में इस तरह के आयोजनों में और उन्नत मॉडल, वैज्ञानिक कार्यशालाएं और प्रयोग आधारित गतिविधियां जोड़ी जा सकती हैं। इससे विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और इंजीनियरिंग की शुरुआती समझ विकसित करने में मदद मिल सकती है।

गौलापार में आयोजित हाइड्रो रॉकेट प्रतियोगिता ने यह संदेश दिया कि विज्ञान सीखने के लिए हमेशा जटिल उपकरण जरूरी नहीं होते। सामान्य चीजों से भी वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझा और प्रदर्शित किया जा सकता है। प्लास्टिक की बोतल, पानी और एयर प्रेशर से तैयार मॉडल ने विद्यार्थियों को रॉकेट के मूल सिद्धांतों का अनुभव कराया।

कुल मिलाकर, गौलापार के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर में आकाशीयन स्पर्धा नेशनल रॉकेटरी चैलेंज के तहत स्कूली विद्यार्थियों की हाइड्रो रॉकेट प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्रों ने प्लास्टिक की बोतलों से रॉकेट तैयार किए और उसमें करीब 70 प्रतिशत पानी भरकर एयर प्रेशर की मदद से उन्हें उड़ाया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, प्रयोगात्मक सीख और ईंधन संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। छात्रों ने भविष्य में वैकल्पिक ऊर्जा आधारित तकनीकों की संभावनाओं को लेकर भी अपने विचार साझा किए। इस आयोजन ने स्कूली विद्यार्थियों को विज्ञान, नवाचार और रॉकेटरी के क्षेत्र में रुचि विकसित करने का अवसर दिया।

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